Antarvasana-hindi-kahani May 2026

पहली बार उसने ब्रश उठाया तो हाथ काँपा। उसे लगा जैसे कोई उसे देख रहा है। पर कोई नहीं था। सिर्फ दीवारों पर उसकी अपनी परछाइयाँ थीं।

जब वह पेड़ बनाती है जिसकी जड़ें आसमान की तरफ उठ रही हैं, तो यह एक प्रतीक है — वह पेड़ मीरा खुद है, जो ज़मीन की कैद से मुक्त होना चाहती है, आकाश की ओर बढ़ना चाहती है। वह रोती है, लेकिन दर्द से नहीं — राहत से। क्योंकि दबी हुई वासना को बाहर निकालना ही मुक्ति है। antarvasana-hindi-kahani

(एक कहानी)

उसने एक रेखा खींची। फिर दूसरी। फिर एक आकाश बनाया — नीला नहीं, बल्कि ऐसा नीला जैसे सपनों में दिखता है। फिर एक पेड़ बनाया — जिसकी जड़ें ज़मीन से बाहर थीं, आसमान की तरफ उठ रही थीं। antarvasana-hindi-kahani