अगर आप सोच रहे हैं कि यह कोई शेयर बाजार या सब्जी मंडी की कहानी है, तो आप गलत हैं। यहाँ का 'बाज़ार' वह बाज़ार है जहाँ इंसानियत, भावनाओं, सपनों और शरीफ़ इंसानों की इज्जत का सौदा होता है। "बाज़ार" एक ऐसे युवक की कहानी है, जो अपनी बहन की शादी के लिए मदद की गुहार लेकर शहर आता है। उसे लगता है कि शहर के लोग सहानुभूति रखेंगे, लेकिन यहाँ का बाज़ार बेरहम है। यहाँ एक अमीर और शातिर सेठ (कादर खान का शानदार किरदार) उसकी मजबूरी का फायदा उठाता है। वह उसे पैसे देता है, लेकिन बदले में उसकी खूबसूरत बहन पर बुरी नज़र रखता है।

आज हम बात करेंगे 1982 में रिलीज़ हुई उस फिल्म की, जिसने बॉलीवुड के मसाला फिल्मों के रंग-ढंग से हटकर एक कड़वा लेकिन सच्चा अध्याय पेश किया। फिल्म का नाम है ।

नमस्कार दोस्तों,

क्या आपने यह फिल्म देखी है? नीचे कमेंट में बताइए। क्या आपको लगता है कि आज भी ऐसा 'बाज़ार' चलता है? आपकी पसंद का ब्लॉग लिखने के लिए, मैंने फिल्म "बाज़ार" (1982) को चुना। अगर आप 2006 की फिल्म "बाज़ार-ए-हुस्न" या किसी अन्य फिल्म के बारे में चाहते थे, तो कृपया स्पष्ट करें।